क्रिकेट का सच्चा फैन जीत का जश्न ट्रॉफी उठाते हुए देखना चाहता है, लेकिन एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी का मामला हमें बार बार खटकता रहा है। पिछले साल पुरुष टीम के साथ जो हुआ, वही अब महिला टीम के साथ दोहराया गया। श्रीलंका को हराकर खिताब जीतने के बावजूद भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार करने पर मजबूर हुई। एक फैन के तौर पर हमारे लिए यह गर्व की बात है, पर साथ ही टीस भी है कि चैंपियन के हाथ में ट्रॉफी नहीं है।
एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी: पिछले साल दुबई में क्या हुआ था?
याद कीजिए पिछले साल का दुबई फाइनल। भारत ने पाकिस्तान को हराया था और स्टेडियम से लेकर टीवी के सामने बैठे करोड़ों घरों तक जश्न का माहौल था। पर पुरस्कार वितरण के वक्त भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने से मना कर दिया, क्योंकि ट्रॉफी देने वाले मोहसिन नकवी ACC अध्यक्ष होने के साथ-साथ PCB के चेयरमैन और पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं।
BCCI सचिव देवजीत साइकिया ने तब साफ कहा था कि भारत यह ट्रॉफी ऐसे व्यक्ति से नहीं लेगा जो पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में गिने जाते हैं। यही एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी की असली जड़ है। हम फैंस ने उस दिन खाली मंच पर खड़े खिलाड़ियों को देखा और समझ गए कि यह सिर्फ एक ट्रॉफी का मामला नहीं, स्वाभिमान का सवाल है।
भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार: बेटियों ने दोहराया इतिहास
एक हफ्ते पहले दुबई में खेले गए विमेंस एशिया कप फाइनल में हरमनप्रीत कौर की टीम ने श्रीलंका को एकतरफा मुकाबले में हराया। मैदान पर दबदबा दिखाने के बाद पुरस्कार समारोह में बेटियों ने वही रास्ता चुना, जो पुरुष टीम ने चुना था। भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार का यह फैसला पूरी टीम की एकजुटता दिखाता है।
हेड कोच अमोल मुजुमदार ने कहा कि यह कदम BCCI की नीति के अनुरूप था और उनके लिए टूर्नामेंट खत्म हो चुका है, क्योंकि टीम चैंपियन है। सच कहें तो इस जवाब ने हमारा दिल जीत लिया। जब भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार करती है, तो संदेश साफ होता है कि हमारी बेटियाँ मैदान के साथ साथ मंच पर भी झुकने वाली नहीं हैं। सोशल मीडिया पर फैंस ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया।
एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी: ट्रॉफी अब भी दुबई में क्यों अटकी है?
सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने महीनों बाद भी पिछले साल की ट्रॉफी ACC मुख्यालय में ही रखी है। BCCI ने कई बार औपचारिक अनुरोध भेजे, श्रीलंका और अफगानिस्तान के बोर्डों ने भी भारत का साथ दिया, लेकिन नकवी अपने रुख पर अड़े रहे। उन्होंने भारत से कहा कि वह ACC दफ्तर आकर खुद ट्रॉफी ले जाए, जिसे BCCI ने सिरे से खारिज कर दिया।
हम फैंस पूछते हैं कि जीती हुई ट्रॉफी लेने के लिए कोई चैंपियन टीम किसी के दफ्तर के चक्कर क्यों काटे? यही वजह है कि भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार के फैसले को इतना समर्थन मिल रहा है। जब तक यह मामला नहीं सुलझता, दोनों जीतें अधूरी सी लगती रहेंगी।
एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी और ICC की मध्यस्थता: फैंस को क्या मिला?
हाल ही में दुबई में ICC बोर्ड बैठक के दौरान BCCI और PCB के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई, जिसमें ICC के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में नहीं था, फिर भी दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। इससे फैंस के मन में उम्मीद जगी थी कि शायद अब बर्फ पिघलेगी।
पर नतीजा वही रहा, यानी कोई ठोस हल नहीं और ट्रॉफी अब भी दुबई में पड़ी है। हम फैंस के लिए यह निराशाजनक है, क्योंकि ICC जैसी संस्था के बीच में आने के बाद भी भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार जैसी नौबत बार बार आ रही है।
क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
महिला टीम के फैसले ने साफ कर दिया है कि यह अब एक बार की घटना नहीं, बल्कि BCCI की स्थायी नीति बन चुकी है। जब तक नकवी जैसे राजनीतिक रूप से जुड़े अधिकारी ACC का नेतृत्व करते रहेंगे, ऐसी संभावना कम ही है कि एशिया कप ट्रॉफी विवाद मोहसिन नकवी का यह अध्याय जल्दी बंद होगा। आगे भी अगर भारतीय टीमें जीतीं, तो भारत महिला टीम ट्रॉफी लेने से इनकार जैसा नज़ारा फिर दिख सकता है।
एक फैन के तौर पर हम बस इतना चाहते हैं कि क्रिकेट राजनीति से ऊपर रहे और चैंपियन टीमों को उनकी मेहनत की ट्रॉफी सम्मान के साथ मिले। तब तक हमारे लिए हमारी टीम, चाहे पुरुष हो या महिला, हमेशा चैंपियन है।
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